Pradip Kumar Royपंजाब एंड सिंध बैंक से सेवानिवृत बचपन से ही लेखन में आपकी रुचि रही है। कविता और कहानियाँ आप स्वांतः सुखाय लिखते थे। बैंक में कार्यरत आपने कहानियाँ और कविताएं लिखी जिसे विभिन्न अंतरबैंक प्रतियोगिताओं में सराहा गया तथा पुरस्कृत किया गया। आजकल आप ओड़िआ स हिन्दी तथा हिन्दी से ओड़िआ अनुवाद कार्य में व्यस्त हैं। आपकी कई अनूदित कहानियाँ समकालीन भारतीय साहित्य के साथ-साथ अन्य पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं। हिन्दी और ओड़िआ के अलावा गुरमुखी और बांग्ला भाषा पर भी आपका पर्याप्त अधिकार है। Read More Read Less
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