Tarun Sharmaतरुण शर्मा ऋषिकेश शहर में पले-बढ़े लेखक हैं, जिन्होंने बड़े और छोटे शहरों की हलचल को बहुत करीब से जिया है। ""शहरगर्द"" उनके लिए सिर्फ़ उपनाम नहीं, बल्कि वह नज़रिया है जिससे वे शहरों की धूल में छुपे जज़्बातों को देखना और समझना चाहते हैं। बचपन में भरे-ूरे परिवार में रहते हुए और फिर दिल्ली, सिंगापुर, बैंगलोर जैसे शहरों में पढ़ाई और काम करते हुए तरुण ने ज़िंदगी के कई रंग देखे। पिछले दो दशकों से वे डायरी, ब्लॉग और लॉगबुक्स में अपने अनुभवों, ख्वाबों और सवालों को दर्ज करते रहे हैं।उनकी लेखनी में छोटे शहरों की खुशबू, बड़े शहरों की बेचैनी, और आत्ममंथन की तड़प साथ चलती है। ""शहरगर्द"" के ज़रिए वे उन आवाज़ों को शब्दों में पिरोते हैं, जो अक्सर शहर की भीड़ में खो जाती हैं। Read More Read Less
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