Gaurav Aroraएक सरल कविता हर दिन शांति से शुरू होता है, जब रोशनी कमरे में प्रवेश करती है और छोटी-छोटी आवाज़ें दुनिया को जगाती हैं। एक कप चाय, कदमों की आहट, और हवा की हल्की सी हरकत हमें याद दिलाती है कि जीवन छोटे-छोटे पलों से बना है। ये पल अक्सर अनदेखे रह जाते हैं, फिर भी अपने भीतर कई कहानियाँ समेटे होते हैं। लोग अपनी दिनचर्या में आगे बढ़ते हैं-काम पर जाते हुए, बस स्टॉप पर इंतज़ार करते हुए, मुस्कानें बाँटते हुए, और अनकहे विचारों को मन में लिए हुए। इन साधारण दृश्यों में कविता चुपचाप जीवित रहती है। यह ठहराव में, थकी हुई आँखों में, और हर सुबह लौटने वाली उम्मीद में मौजूद होती है.. Read More Read Less
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